वृक्ष मित्रों की सुरक्षा के बिना मानव जीवन खतरे में

मानव के ये सच्चे मित्र है। धुप बढ़ती है तो मानव इनकी गोद में जाता है छाया के लिए खुद गर्मी सेहकर ये हमें छाया देते है। फल देते हैं। जलाने के लिए ओर फर्नीचर के लिए लकड़ी देते हैं (हमें कभी भी हरे पौधे पेड़ नहीं काटने चाहिए ये शास्त्रअनुकूल नहीं हैं गलती से कट जाने पर कमसे कम 11 या 21 वृक्ष लगाने का विचार सुझाव  धार्मिक ग्रंथों में है )ओषधि देते हैं यहाँ तक की हिन्दू धर्म में तो मरने के बाद अग्निसंस्कार  तक ये साथ होते हैं। आक्सीजन देने ओर कार्बनडाइ आक्साइड छोड़ ने के कारण वायुमंडल में भी संतुलन रखते है। कुल मिलाकर जीवन के लिए जरुरी सांस पर भी इनका ही राज है ओर मानव इन्हे यानी हम इन्हे इग्नोर करते हैं। मित्रो प्यारे साथियो मेरी दिली इच्छा है मैं कम से कम 10-20हजार वृक्ष लगाऊं मेरे गांव में लगाना चाहता   हूँ समस्या ये है मैं रेवाड़ी में रहता हुँ। मैने सुरुवात यहीं से कर भी दी है ओर विभिन्न जानकारियों का कोस बढ़ा रहा हुँ की पौधों की जरूरते क्या हैं उनकी समस्या  बीमारियां कैसे वो पनपते हैं कैसे बड़े होते हैं। इसके लिए मैने बीज ओर खाद का संग्रह करना भी सुरु कर दिया है। महेन्दरगढ़ जिले में 5से 7हजार करीब आबादी का मेरा गांव आर्थिक रूप से लगभग संपन्न गांव है ज्यादा तर लोगो आर्मी या अन्य नोकरियोन पर हैँ। इस लेख के माध्यम से मैं सहयोग की अपील करता हुँ। सहयोग में पैसे की जरुरत नहीं बस मेरे मन में वृक्षारोपण का प्लान है उसमें मदद करें ओर कैसे होगा के विचार वाले साथियों की जरुरत है जो क्रियान्वन में सहयोग दे। क्या आप जानते है पेड़ होने हरा भरा छेत्र होने के लाभ क्या हैं। पेड़ ज्यादा होने से वातावरण तो शुद्ध होता ही है। बरसात भी आती है। जल स्तर सुधरता है। स्वस्थ उपयोगी जड़ी पौधे भी लाभकारी हैं जो पेड़ो के साथ खुद पनप जाते हैं पशु पक्षी ओर लाभकारी कीट आते हैं फसल को फायदा मिलता है। ओर भी हजारों लाभ हैं। 
मानव जीवन के सबसे अहम् दोस्त हैं पेड़पौधे ये वो कड़ी हैं जो जीवन को जोड़ कर रखें हैं मानव सांस से लेकर दवा से लेकर घर बनाने से लेकर हजारों काम जो उसके जीवन को चला रहे हैं पौधों के पेड़ों के कारण कर पाता है पर क्या वो पेड़ लगाने का महत्व जानता है सायद नहीं जानता। दिन प्रतिदिन सिर्फ दोहन ओर कुछ नहीं। प्राकृतिक बैलेन्स भी कोई चीज है क्या इस प्रकार किसी चीज को जिम्मेदारी से हट कर सिर्फ खाये जाना सही है। क्या सिर्फ खाने के लिए फसल उगना चाहिए। सायद ये हम मानवों की भूल है। सनातनी इसे नहीं थे। महर्षि सतायु ने जीव होने के कारण जीव को उनके कारण हानी ना पहुंचे इस उद्देश्य से खाना छोड़ दिया क्योंकि वो प्रकृति के हर जीव का महत्व समझते थे उन्होंने हजारों वृक्षो ओर पशुओं की सेवा की। गुरु जम्भेस्वर जी को कौन नहीं जनता। बिश्नोई समाज वृक्षो के महत्व को जानता था। किसी समय में इसी विचार के कारण चिपको आंदोलन चला। लेकिन आज वो विचार शून्य हैं। आज जनसंख्या ज्यादा है ओर पेड़ पौधों को ज्यादा मारा काटा जा रहा है। पर क्या इनका खून किसी अपने किसी प्यारे ओर सच्चे  मित्र के खून से कम है। जब मैने गहराई से सोचना सुरु किया तो मुझे झझकोर के रख देने वाली बात पता चली की 70%हम इन पर ही डिपेंड हैं पर इनकी सुरक्षा के लिए हम -20%प्रयास करते हैं ओर येआंकड़ा हरान कर देने वाला था। मैने निश्चय किया की प्रति दिन कमसे कम एक घंटा मैं एवरेज इनकी सेवा में लगाऊंगा। इनके साथ पक्षी ओर जानवरों की भी सुरक्षा होगी। ओर आपसे भी अपील करता हुँ की आप भी पेड़ लगाएं। हाँ रोज जरुरी नहीं एक दिन दस घंटे इन पर काम करो, समय लगे तब कर लो महीने में बाकि दिन 1या आधे घंटे जैसे भी समय मिले पर इनकी सम्हाल बच्चे की तरह करनी पड़ेगी सुरक्षा ओर बाड़ बँधी तथा खाद ओर पानी समय पर देना पड़ेगा। ओर काटछांट भी तथा रोगों से भी सुरक्षा देनी होगी। तब कहीं जाकर हम सच्चे मित्र जीवन जी पाएंगे। धरती की सन्तानो में मानव के साथ साथ पशु ओर पेड़ भी बराबर हिस्सेदार हैं लेकिन क्या उनको इंसानों की तरह उनको उनके मित्र ओर भाई बंधु यानी इंसान उन्हें खुला जीवन जीने देते हैं ये सोचने का विषय है ओर इस बारे में हमें कुछ करना होगा वरना वृक्षो की लगातार कटाई से भूकंप बाढ़ ओर ना जाने जल अस्थिरता जैसी कितनी  समस्या भाविशय में होने वाली हैं।.. 
........>>सबसे पहले मैं मेरी पोस्ट को पढ़ने वाले सभी पाठकों को नमन करता हूँ की आपने मेरी लेखनी से निकले इन शब्दों को पढ़ा ओर इस विषय पर लिखे गए लेख में रूचि दिखाई,  प्यारे  विधार्थीयो ओर पाठक मित्रो  मेरा उद्देश्य विषय परक सटीक महत्वपूर्ण ओर सही जानकारी आपको देकर आपके ज्ञान संग्रह को बढ़ाना है ओर मेरी कोशिस रहती है की तथ्य परक बात की जाये वही करता भी हूँ परन्तु इंटरनेट पर  लेखन का ज्यादा अनुभव ना होने के कारण लिखने में भाषागत वर्तनी सम्बंधित अशुद्धि रह गई हैँ अतः आपसे अनुरोध है कृप्या शब्दों के भाव को ही महत्व देकरअशुद्धि को  इग्नोर करें। ओर अगर फिर भी आपको मेरे शब्द कहीं परेशान करें तो आप मुझे :-vikashji 354@gmailcom पर लिख सकते हैं, लेख में कोई गलती हो तो मैं क्षमा प्राथी हूँ। 

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