सनातन धर्म ही दिखाता था भारत को विज्ञान का रास्ता
विज्ञान धर्म से ही उदित हुआ हैभारत के विषय में तो कोई दोराय ही नहीं है, इसका अगर भारत के प्राचीन इतिहास की गहराइ में जाएँ तो साफ पता चल जाता है की मेरी बात कितनी साफ है । दूसरे देशों का तो स्पस्ट नहीं लेकिन भारत में तो धर्म ही विज्ञान या विज्ञान धर्म का ही एक अंग रहा। हाँ कुछ मिथिक ओर अपनी राय लेखकों ने मिला कर काल खंड के बदलाव के साथ साथ धर्म को बदनाम भी किया। लेकिन धर्म का सवरूप आज भी विज्ञान की तरह ही पवित्र है। हिंदुस्तान का इतिहास विभिन्न बदलाव झेल चूका है। याद दिला दूँ प्राचीन सनातन धर्म सब धर्मों का सार है जो भारतीय महाद्वीप में मान्यता प्राप्त हैं। सत्य छुपता नहीं। सनातन धर्म की सच्चाई ओर महानता हिंदुस्तान के कतरे कतरे में बसी है ये ही भारत का उज्जवल सवरूप ओर उसकी उन्नति प्रगति को दर्शाती है जैसे आधुनिक विज्ञान बताता है की मानव ने कहां से कहां तक का सफर किया है। जैसे चिकितश्या विज्ञान में सकरा( मीठा )दवा के साथ ताकत बढ़ाने को दिया जाता है वैसे ही प्राचीन सनातन धर्म में सुबह प्रभात काल मिलन पर ' राम राम ' शब्द सकारात्मक ऊर्जा देने के लिए अच्छे दिन की शुरुआत ओर अच्छे मिलन प्रभाव के लिए वैज्ञानिक शब्द टॉनिक ही रहा है हालांकि राम नाम परमात्मा ओर भगवान का सवरूप है ओर इसके अर्थ गहरे ओर विस्तृत हैं। लेकिन मेरे कहने का मतलब समझ की शुरुआतके पहर से है। जब विज्ञान की तरह कोई अलग स्पस्ट विषय नहीं था तब इसी का सहारा ले कर तथ्यों को समझाया जाता था। आज जब सनातन धर्म की कई शिक्षा मानने की बजाय रूढ़ि बता कर अकारण विरोध किया जाता है तब मुझे अच्मभा होता है। मैं सोंचता हुँ विज्ञान को महान बताने वाले लोग उसी का मज़ाक उड़ा रहे हैं। कॅरोना वायरस के कारण ' नमस्ते' जिसमे हाथ जोड़ कर दूर से प्रणाम किया जाता है प्राचीन सनातनी परंपरा पुनः प्रकाश में आई। अंग्रेज हाथ मिलाने ओर गले मिलने तक इसे ले गए ओर इसे सलूट, हाथ मिला
ना, गले लगाना विभिन्न प्रकार के व्यक्ति विभिन्न प्रकार के अभिवादन तक ले गए। क्योंकि आपका सुबह अच्छा हो, शाम अच्छा हो, दोपहर अच्छा हो ये चीजें उस शब्द की बराबरी नहीं कर पा रही थी जो उस सभ्यता काल में उनके देश में विकसित था। आज जब नमस्ते का प्रयोग की जरूरत पड़ी तो सायद महत्व भी लोग जानना चाहेंगे इसके लिए सनातन धर्म की गहराइ में जाना पड़ेगा।विभिन्न प्रकार के उपयोगी वृक्षो की पूजा, पितृ पक्ष में भोजन, अमावस्या पर गाय का भोजन, गाय की रोटी निकलना, हनुमान जी का व्यापक सवरूप ओर भुत दूर करना,गाय के गोबर का चौका लगाना (कच्चे आँगन में ) आदी विभिन्न वज्ञानिक महत्व के विषय हैं जिनको हिंदुस्तान खुद सायद नहीं समझ सका लेकिन जर्मनी जैसे देश के लेखक इस विषय में लिख चुके हैं की सनातन धर्म का महात्य भारत के लिए क्या रहा ओर क्या है। स्वामी दयानन्द, विवेकानंद जी को पुरे विश्व समुदाय ने इन्ही सनातनी शिक्षाओन के कारण माना।
मेरे विभिन्न लेखों में मैने विस्तार से भी इनका अर्थ बताया है। ये सनातनी लोग क्या करते थे ओर वो महत्व पूर्ण क्यों है लेकिन कुछ चीजें इनमे भारमक मिला कर पंडितों का विरोध किया जाता रहा ओर सनातन धर्म की अनदेखी हुई क्योंकि पंडित प्रचारक होते थे। लेकिन जब शोध हुए तो इनका महत्व जग जाहिर हुआ लाखों लोग आज हिन्दू धर्म के प्रति आकर्षित हो रहे हैं उसका कारण प्राचीन वैज्ञानिक तत्वों की जानकारी उनका उपयोग महत्व की समझ यहाँ के सनातनी लोगों को होना ही है। आज विदेशो में बहुत जगह आपको हिन्दू परम्परा मानने वाले लोग हवन करते मिल जायेंगे। हवन से ना सिर्फ वायु सुधि बल्कि अनेक लाभ हैं ओर वो महसूस करने की बात है। आर्यो के अग्निहोत्र करम की राख को जब पानी में मिला कर मिनरल वाटर या आरो के पानी के समक्क्ष दोनों की तुलना की गई तो ये हजार गुना लाभकारी था। वायु अग्नि पृथ्वी जल आकाश सनातनी सब तरह की वैज्ञानिक
पर्क्रियाओं में इन्ही तत्वों को गणना करते थे ओर मानव का आधार समझते थे। उन्होंने इनके दस से दस सांकह तक टुकड़े (भागो)में तक जाकर इनके अनुपरयोग उप्परयोगबताये जिसके कुछेक चीजे ही इस पीढ़ी तक पहुँची हैं आधुनिक विज्ञान तत्व ओर उप तत्व से ज्यादा कोशिस करके भी नहीं जा पा रही क्योंकि क्योंकि उनका बुद्धि का स्तर खान पान रहन सेहन उतना दृढ नहीं है। मेहनत का स्तर साहस ओर किसी तथ्य तक जाने के लिए जो इंतजार उन्होंने अपनी तपस्या में किया था उतना आजकल के वज्ञानिक सायद ही कर पाएं। अगर ध्यान पूर्वक हिन्दू सनातन धर्मकी पुस्तकों को पढ़ा जाये तो सायद ही आजकल के विज्ञान विषय को भी पढ़ने की आवश्यकता पड़े।
लेखक विकाश तंवर खेड़ी -9812073306.सबसे पहले मैं मेरी पोस्ट को पढ़ने वाले सभी पाठकों को नमन करता हूँ की आपने मेरी लेखनी से निकले इन शब्दों को पढ़ा ओर इस विषय पर लिखे गए लेख में रूचि दिखाई, प्यारे विधार्थी ओर मित्रो सटीक महत्वपूर्ण ओर सही जानकारी आपको देकर आपके ज्ञान संग्रह को बढ़ाना है ओर मेरी कोशिस रहती है की तथ्य परक बात की जाये परन्तु इंटरनेट पर लेखन का ज्यादा अनुभव ना होने के कारण लिखने में भाषागत अशुद्धि रह गई हैँ आपसे अनुरोध है कृप्या शब्दों के भाव को ही महत्व देकर इसे इग्नोर करें। ओर अगर फिर भी आपको मेरे शब्द कहीं परेशान करें तो आप मुझे :-vikashji 354@gmailcom पर लिख सकते हैं, लेख में कोई गलती हो तो मैं क्षमा प्राथी हूँ।
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