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Showing posts from 2020

वृक्ष मित्रों की सुरक्षा के बिना मानव जीवन खतरे में

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मानव के ये सच्चे मित्र है। धुप बढ़ती है तो मानव इनकी गोद में जाता है छाया के लिए खुद गर्मी सेहकर ये हमें छाया देते है। फल देते हैं। जलाने के लिए ओर फर्नीचर के लिए लकड़ी देते हैं (हमें कभी भी हरे पौधे पेड़ नहीं काटने चाहिए ये शास्त्रअनुकूल नहीं हैं गलती से कट जाने पर कमसे कम 11 या 21 वृक्ष लगाने का विचार सुझाव  धार्मिक ग्रंथों में है )ओषधि देते हैं यहाँ तक की हिन्दू धर्म में तो मरने के बाद अग्निसंस्कार  तक ये साथ होते हैं। आक्सीजन देने ओर कार्बनडाइ आक्साइड छोड़ ने के कारण वायुमंडल में भी संतुलन रखते है। कुल मिलाकर जीवन के लिए जरुरी सांस पर भी इनका ही राज है ओर मानव इन्हे यानी हम इन्हे इग्नोर करते हैं। मित्रो प्यारे साथियो मेरी दिली इच्छा है मैं कम से कम 10-20हजार वृक्ष लगाऊं मेरे गांव में लगाना चाहता   हूँ समस्या ये है मैं रेवाड़ी में रहता हुँ। मैने सुरुवात यहीं से कर भी दी है ओर विभिन्न जानकारियों का कोस बढ़ा रहा हुँ की पौधों की जरूरते क्या हैं उनकी समस्या  बीमारियां कैसे वो पनपते हैं कैसे बड़े होते हैं। इसके लिए मैने बीज ओर खाद का संग्रह करना भी सुरु कर दि...

श्राद्ध पक्ष में गाय को रोटी देना ओर सनातन धर्मियों का विज्ञान।

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हमारे पूर्वज सनातन धर्मी आर्य ओर भारत के प्राचीन निवासी सूर्य को जल को पृथ्वी वायु अग्नि को आकाश को देवता मानते थे ओर उन्होंने बहुत सी परम्परा चलाई जो गाय यानी गौ माता से संदर्भित थी।  गाय को रोटी देना, अमावस्या की रोटी, गौ ग्रास, पितृ पक्ष की गाय को रोटी देना आदी बहुत चीजें हैं लेकिन आज छोटा विषय लेंगे :-पितृ पक्ष निकलना या कनागत निकलना । क्या आप इनके पीछे की सच्चाई जानते हैं अगर नहीं तो आपको मैं पुनः मेरे पिछले लेख वाली  बात याद दिला दूँ की भस्मासुर के वरदान से खोप खाये देवता गौ माता जो तत्कालीन कपिला गाय नामक जीव थी उसके गर्भ में छुप गए थे ताकि उन्हें मारा ना जा सके ओर वहीं करीब 9माह कुछ दिन छुपे रहे 10 वे महीने में भगवान शिव ने विष्णु भगवान से विनती की मोहिनी रूप धारण कर आप उसे निर्त्य कराओ ओर ये आशन कराओ आदी निर्देश दिए  ऐसा हुआ  तब कही जाकर उसका संहार हुआ। क्या गौ माता के बीना ऐसा संभव था। गौ माता जो सतयुग में अजर अमर थी क्योंकि उन्हें देवलोक में वरदान मिला था, गौ माता  में समस्त देवियां निवास करती हैं ओर सब देवता भी वो उस युग में भी थे आज भी व...

गाय को साधारण पशु समझना भूल,दर्सन मात्र से कई तीर्थो का फल मिलता है, गौ सेवा से होता है जन्मांतर के पापों का नाश।

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देवताओं के शरीर में वास की कहानी :-कहते हैं जब भस्मासुर ने देवताओं का पीछा किया तो उनको छुपने को जगह नहीं मिली ऐसे में वो ऋषियों के आश्रम गए वहाँ भी भस्मासुर ऋषियों का भी दुश्मन हो गया। बिजली सवरूप देववाणी जो आकाशवाणी के नाम से जानी जाती है वो समस्या को जटिल होते देख भस्मासुर वध तक कपिला गाय से मदद मांगने हेतु देवताओं का मार्ग दर्सन कियाक्योंकि उन्हें अमृता का वरदान प्राप्त था ।देवताओं ने माता से सरन की अनुमति मांगी ओर  सारे देवताओं ने गौ माता के विभिन्न अंगों में वास किया। भस्मासुर में इतनी सक्ति नहीं थी की माता कपिला के सवरूप को वो देख भी पाता। जब भस्मासुर वध हो गया तो देवताओं ने माता कपिला गाय को वरदान मांगने के लिए बोला तो उन्होंने कुछ नहीं मांग कर उसे अपना सौभाग्य बताया ओर कहा की आप इसी तरह मेरे शरीर में वास करते रहिये ओर ऐसा हुआ भी सवं ब्रह्मा विष्णु महेश भी शरीर में रहे ओर सुख का अनुभव किया बदले में अनेकों वरदान भी दिए। अपने शरीर में जगह देने के कारण ओर देवताओं को बचा कर जीवन देने के कारण वो कामधेनु माता कहलाइ । तब से आज तक गाय देवी सक्ति प्राप्त जानवर है ओर उसमे...

सूर्य को जल अर्पण के सहस्त्रों लाभ हैं

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  सनातन  धर्म की कुछ शिक्षाओं मे एक है सूर्य को जल अर्पण जिसके लाखों लाभ हैं इसी प्रक्रिया का प्रारम्भ क्रम सुबह जल्द उठने से है जिसके भी हजारों लाभ हमारे वेद पुराणों मे लिखें हैं इसी प्रकार दूसरे धर्मों मे भी होगा मेरा कहने का मतलब धार्मिकता से नहीं प्राचीन समय से इसकी उपयोगिता से है। जब हम जल्द उठते हैं तो हम अंधकार से प्रकाश मान होते संसार को देखते हैं जो मनोवज्ञानिक सकारत्मकता की संरच्चना करती है मस्तिक मे की अंधकार के बाद प्रकाश अवश्य होता है। इस समय मस्तिक शांत ओर अति गति सील अवस्था मे होता है ज्ञानार्जन हो या कोई अन्य उपयोगी  किर्या जैसे योग प्राणायाम ध्यान पूजा पाठ सब मे इस समय पर  सकारात्मक परिणाम मिलते हैं। फिर दूसरी अन्य कामों पर धयान डाइवर्ट नहीं रहता,  वातावरण का लाभ भी मिलता है। सुबह उठने से समय की अधिकता का लाभ भी मिलता है। सुबह के वक्त ही मस्तिक अधिक जागृत अवस्था में रहता है।  प्रभाव :-जब जल को कासी या ताम्र बर्तन में लिया जाता है तो जल रोगाणु मुक्त हो जाता है वही जल जब सूर्य के प्रारम्भिक प्रकाश में आता है फिर वायु आकाश पृथ्वी स...

सनातन धर्म ही दिखाता था भारत को विज्ञान का रास्ता

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विज्ञान धर्म से ही उदित हुआ हैभारत के विषय में तो कोई दोराय ही नहीं है,  इसका अगर भारत के प्राचीन इतिहास की गहराइ में जाएँ तो साफ पता चल जाता है की मेरी बात कितनी साफ है । दूसरे देशों का तो स्पस्ट नहीं लेकिन भारत में तो धर्म ही विज्ञान या विज्ञान धर्म का ही एक अंग रहा। हाँ कुछ मिथिक ओर अपनी राय लेखकों ने मिला कर काल खंड के बदलाव के साथ साथ धर्म को बदनाम भी किया। लेकिन धर्म का सवरूप आज भी विज्ञान की तरह ही पवित्र है। हिंदुस्तान का इतिहास विभिन्न बदलाव झेल चूका है। याद दिला दूँ प्राचीन सनातन धर्म सब धर्मों का सार है जो भारतीय महाद्वीप में मान्यता प्राप्त  हैं। सत्य छुपता नहीं। सनातन धर्म की सच्चाई ओर महानता हिंदुस्तान के कतरे कतरे में बसी है ये ही भारत का उज्जवल सवरूप ओर उसकी उन्नति प्रगति को दर्शाती है जैसे आधुनिक विज्ञान बताता है की मानव ने कहां से कहां तक का सफर किया है। जैसे चिकितश्या विज्ञान में सकरा( मीठा )दवा के साथ ताकत बढ़ाने को दिया जाता है वैसे ही प्राचीन सनातन धर्म में सुबह प्रभात काल मिलन पर ' राम राम ' शब्द सकारात्मक ऊर्जा देने के लिए अच्छे दिन की शुरुआत...

कॅरोना ही नहीं काफ़ी बिमारियों मे लाभ कर सकते हैं कुछ आयुर्वेदिक प्रयोग

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आयुर्वेद मे गंभीर से गंभीर रोग का इलाज है। कई बार आयुर्वेदिक उपचार को फेल होते भी देखा जाता है उसका कारण जड़ी बूटी आदी का सही शुद्ध ना करना या मात्रा का कम ज्यादा कर देना होता है खान पान भी इसमें रोग की अवस्था को देख कर ही किया जाना होता है फिर आयुर्वेद की ज्यादातर दवा पौधों ओर खनिजों से बनी होती है जिन पर मौसम का ओर जिस वातावरण मे वो पैदा होती है उसके खिलाफ तापमान मे रखने का भी असर रहता है। जीवाणु हो या विषानु आयुर्वेद मे सब को रोकने ओर मारने का बंदोबस्त है लेकिन ओषधि के साथ साथ इंसान को दिनचर्या भी बदलने की जरुरत होती है। सर्दी जुकाम का मरीज अगर ठंडा पानी पियेगा तो उसका इलाज राम भरोसे है यानी नार्मल या गरम पानी ऐसे मे बेहतर है। गंभीर जीवाणु विषानु का    इलाज क्या करें :- अगर फ़्लू जैसे हालत हो तो बाम या विक्स अगर ना मिले तो  नीलगिरि, ओर कपूर ओर मिंट डाल कर भाप लेनी चाहिए। ओर कफ अगर छाती मे जमता हो गले मे जमता हो गरारे से आराम ना मिले तो सुबह सुबह सिंधौ नमक(एक चमच  काला लून )3ग्लास पानी मे डाल कर पहले पी ले गुनगुने पानी मे हल्का गरम रखें पानी फिर पी कर उलट...