पुस्तकें पढो ये पढ़ने की चीजहै-उपयुक्त लेख सिर्फ उत्प्रेरणा है कामयाबी जिज्ञासु होने में है।
पुस्तकें पढो ये पढ़ने की चीज है।आज आधुनिक युग में हमारे पास बहुत आप्सन हैं कि किस तरह किताब पढ़ें जैसे ई बुक।पुस्तकें लक्ष्य की ओर ले जाती हैं।लक्ष्य वो जगह है जहाँ एक युवा और बच्चे का एक बुजुर्ग सब को जाना है जहाँ जाना है वो मात्र मृतु नहीं है।जितने भी सफल लोग हुए उनका पुस्तकों से खास लगाव रहा।कलाम जी को मैने बहुत गहराई से पढ़ा उन्होंने अपनी पुस्तक अग्नि की उड़ान में खुद बताया कि उन्हें पुस्तकों से कितना लगाव था।अज्ञानता का आवरण हटाने के लिए ज्ञान से रूबरू होना जरूरी है।मैने कई लेख लिखे मेरा पहला लेख गांव के इतिहास के बिसय में था मेरे गाँव से लेखन की सुरुवात हुई मैं बहुत खुश था कि मैंने करीब 9 साल लगातार ओर पिछले 9 महीने जब ये लिखा से गहन इतिहास का अध्यन जिसमे छेत्र पुस्तकें ओर व्यक्तिगत जानकारी थी इकठ्ठा कर कुछ बाते निकाली की गांव के नाम की उत्पत्ति कैसे रही होगी आदि अपने विचार रखे काफी लोगों ने प्रसंसा की लेकिन जिनको मेरी बात समझ नहीं आई गांव की भासा में खास लोग उन्होंने विरूद्ध होकर मुझे खदेड़ा की ऐसा न लिखूं इतिहास खराब मत करो मैने सिर्फ इतना कहा ये मेरे विचार मात्र है आपकी भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं लेखन मेरी रुचि ओर काम है मैं इसे छोड़ नहीं सकता।हाँ कुछ लोग जो मेरी तरह लेखन में थे मुझे बहुत प्रोत्साहित किया मैं सुक्रगुजर हूँ उनका ।यकीन मत मानिये इतना विरोध हुआ।मैने उसके 6 महीने तक कुछ नहीं लिखा।लेकिन लिखना छोड़ा नहीं।ये पढ़ाई करके उसे प्रयोग करने के बाद कि बात है ज्ञान द्वंद तक भी ले जाता है।लेकिन जब आप उसे समूल लेते हो तो वो एक खुराक का काम करता है।लेकिन जब आप पढ़ते हो तो आपकी उत्सुकता जिज्ञासा आपको जिंदा रखती है।पुस्तकों से निकलना एक अभ्यास है।ये अभ्यास आपको मजबूत बनाता है।जब मैने दुनिया के महान 101 व्यक्तियों के बारे में जानना चाहा तो मैने उनके विसय में एक पुस्तक पढ़ी लोग प्रेरणा लेने हेतु बुक पढ़ते हैं मैने ये ढूंढने के लिए पढ़ी की क्या कोई ऐसा भी था जो बिना मेहनत के भाग्य वस महान बना हो क्योंकि हर व्यक्ति एक बार बिना मेहनत सफलता चआहत ह। मैने देखा बिना मेहनत के उनमें से एक भी व्यक्ति नहीं था जो भी था हर व्यक्ति महान इंसान परिस्थितियों का बुरी तरह तोड़ा ओर मेहनत किया हुआ इंसान था कई ने तो मेहनत की भी चर्म तक कोशिस की थी।किताबें ये सब सिखाती हैं।जब आयु के विभिन पड़ाव पार कर आप बुढ़ापे में जाओगे तो ये ज्ञान एक बड़ी उपलब्धि होगा जो आपने पुस्तकों से एकत्रित किया है।आपको
अपने काम पे ध्यान देना पुसतकें सिखाएंगी मैने कलाम जी की पुस्तकों से ये सीखा की अच्छी पुस्तकों की संगत आपको बुरे लोगों से दूर ले जाती है।समय बहुत कीमती ओर बलवान है।इसका सदुपयोग जरूरी है।आपको मेरी तरह उनसे बहस नहीं करनी जो आपसे ये बोलें की आप बकवास लिखते हो, जो लेख लिखते हो उसे हटाओ बदलो, बस उनसे दूरी बनानी है।क्योंकि ये ही बाधाएं हैं जो जीवन मे आती हैं लेखक के जीवन मे लिखने से रोकने के लिए ओर आपके जीवन मे सफलता से रोकने के लिए।सफलता के लिए सही मार्गदर्शन ओर प्रेरणा अहम चीज है बिना उन लोगों को जाने जो प्रेरित ओर सफल रहे आप में आग नहीं जल सकती हालांकि चिंगारी युवा अवस्था मे हर भारतीय में मिल जाएगी।लेकिन अगर समय पर कोई अच्छी पुस्तक किसी को हाथ लगे तो वो जीवन बदल देती है जैसे बाबा रामदेव को योग से संबंधी, अटल जी को दर्सन ओर रणनीति से संबंधित
ओर जाने कितने ही लोग हैं जो ऐसा करके ही सफल हुए।आप जो करते हैं अज्ञानता किसी न किसी रूप में बाधा बनती है।वो 6 माह 1 वर्ष आपको रोककर आपका समय खराब कर सकती है।लेकिन अगर आप अछि पुस्तकों के मार्गदर्शन में हैं तो ये बाधा तुच्छ हैं।पुस्तकों के पीछे इन्हें पढ़ कर कामयाब होने के पीछे की वैज्ञानिकता क्या है।कुछ बड़ी बात नहीं जब लेखक कोई किताब लिखता है तो उसमें उसकी जीवन भर की मेहनत होती है इसमें दिखाए रास्ते अनेक अनुभवों के अंदर से गुजर कर प्राप्त अमृत होता है जो दृश्य श्रव्य ओर अनुकरण के कई सोपानों से प्राप्त होता है।लिखने के बाद भी संपादन मुद्रण वितरण तक सोध खत्म नहीं होता।जो आपके पास होता है वो अमृत होता है जो विभिन चरणों से पहुंचता हैएक पुस्तक के रूप में।किताबें कैसे मार्गदरसक हैं कैसे क्या हैं इस विसय में बहुत कुछ लिखा जा चुका है वास्तविकता सिर्फ सुनने नहीं अनुभव की बात है।रस सिर्फ जीवह्य तक ले जाने से भी प्यास नहीं बुझती इसे अनुकरण में अंदर तक उतारना होता है यही रस पुस्तकों में होता है ज्ञान का रस जब अंदर जाता है तो सब शांति कर देता है लेकिन पढ़ाकू किस्म में व्यक्ति इसे जीवह्य तक लाकर ही ठंडक का अनुभव करना चाह्ते हैं।पढ़ाकु से जिज्ञासु होना श्रेष्ठ है।आपको मेरे सारे लेख में एक बात जरूर अजीब लगी होगी कि मैने मेरे लेखन के कटु अनुभव को इसमे क्यों जोड़ा वो पुस्तकें पढ़ने और मेरे अछे भले कार्य में किसी व्यक्ति की प्रतिकिर्या में पुस्तकों का क्या संबंध है पुस्तकें पढ़ने न पढ़ने से क्या मतलब है।तो मै इतना ही कहूंगा कि जो लोग आपकी मेहनत देखे बिना आप को प्रतिकिर्या दें भला बुरा कहें उनसे बचना भी आप कुछ अच्छा पढ़ के सिख जाओगे।बस थोड़ा पढ़ाई की आदत बना लो मुझे इसमे लाभ मिला है इसी लिए मने ये वकिया लिखा है।बाकी आप खुद समझ सकते हैं कि लेख का उद्देश्य आप को प्रेरित कर आपका उत्साह बढ़ाना है ताकि आप ज्यादा सिख सकें ज्यादा सीखने से जीवन ज्यादा सरल होगा।
धन्यवाद
आपका अपना विकास तंवर खेड़ी
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