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गणेश जी की आरती :विकास तंवर खेडी

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श्री गणेश जी की आरती  by Vikash Tanwar Kheri श्री गणेश जी की आरती जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी माथे पर तिलक सोहे, मूसे की सवारी जय गणेश,,,,,,,,,, पान चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा लड्डुअन का भोग लगे सन्त करे सेवा।  जय गणेश ,,,,,,,,, अँधेको आँख देत कोढ़िन को काया बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया जय गणेश,,,,,,,,,, सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा माता जाकी पार्वती पिता महादेवा गणेश जी की आरती कार्य की मंगल सुरूवात गणेश जी के नाम के साथ। By Vikash Tanwar kheri

दिवाली के दिन श्री राम लोटे थे बनवास से अयोध्या वापिस तो फिर लक्ष्मी माता जी की पुजा क्यों होती है?

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दिवाली के दिन तो राम जी वनवास से लौटे थे… फिर लोग लक्ष्मी जी की पूजा क्यों करते हैं? क्या है दीवाली के पर्व की हकीकत??         भारतीय पुराणों और धर्म शास्त्रों के अनुसार  दिवाली के दिन ही समुंद्र मंथन के एक चरण में लक्ष्मी जी निकली या अवतरित हुई थी।  वैसे तो लक्ष्मी जी धन धान्य ,समृद्धि ,खुशी, रोशनी और उन्नति का प्रतीक हैं। सर्द पहर का आगमन रोग हरण और नव ऊर्जा का संचार करता है। अतः ये अपने आप में एक उत्सव है।  दूसरा  वक्तव्य और मान्यता अमावस्या एक अंधेरा और सर्दी के मौसम की शुरुवात का दीन है। जिसे भारतीय शास्त्र रोशन करके खुशी में तब्दील करने पे बल देते हैं। अंधेरे का रोशनी में फेरबदल एक मात्र भारतीय संस्कृति में संभव है ये वैसे ही है जैसे मृत्य शरीर को संजीवन अतः ये उत्साह और उमंग वाला त्यौहार है। और भी अनेक मान्यताएं दीवाली के दिन की हैं। मान्यताएं और तथ्य जो विभिन्न परम्पराओं और पीढ़ियों से पर्चलन में है दीपावली उत्सव। – कहा जाता है कि दिवाली को लक्ष्मी पूजा का कारण समुद्र मंथन है इसे लक्ष्मी जी का जन्म दिवस...